स्टेम सेल बैंकिंग क्या है? Pregnancy में हाई BP और प्री-एक्लम्पसिया का खतरा, डॉक्टर ने दी ये अहम सलाह

Summarized by : Cryoviva Team Category: News Breakthrough Published On: 25 May, 2026

स्टेम सेल बैंकिंग क्या है? Pregnancy में हाई BP और प्री-एक्लम्पसिया का खतरा, डॉक्टर ने दी ये अहम सलाह
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Stem Cell Banking In Pregnancy And High BP In Pregnancy: प्रेगनेंसी का समय हर महिला के लिए खास होता है, लेकिन ये सफर आसान नहीं होता, इस दौरान महिलाओं को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. इस दौरान महिलाएं कई तरह की शारीरिक और भावनात्मक बदलावों से गुजरती हैं, जो काफी चुनौतीपूर्ण भी होता है. कुछ ऐसी समस्याएं हैं, जिन्हें महिलाएं नजरअंदाज कर देती हैं, वो है प्रेगनेंसी में हाई बीपी की समस्या. लेकिन, आपको बता दें कि यह यह प्रीक्लेम्पसिया का संकेत हो सकता है, जो आमतौर पर 20 हफ्ते के बाद होने वाली परेशानी है और मां व बच्चे दोनों की सेहत के लिए खतरा बन सकती है, प्रेगनेंसी में हाई बीपी शुरुआत में ज्यादा गंभीर नहीं लगता है. लेकिन, अगर इसे नजरअंदाज किया जाए तो गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है. आइए जानते हैं Pregnancy में High BP और प्री-एक्लम्पसिया के बढ़ते खतरे के बीच, स्टेम सेल बैंकिंग के साथ कैसे अब पैरेंट्स Future Health Security पर फोकस कर रहे हैं.

इसकी गंभीरता को समझना और समय पर इलाज जरूरी

डॉ. गीतिका जस्सल, मेडिकल स्पोक्सपर्सन, क्रायोविवा लाइफ साइंसेज के मुताबिक, प्रेगनेंसी में हाई बीपी एक गंभीर समस्या है और यह प्रीक्लेम्पसिया का संकेत हो सकता है, जो आमतौर पर 20 हफ्ते के बाद होने वाली परेशानी है और मां व बच्चे दोनों की सेहत के लिए खतरा बन सकती है. यह प्रेगनेंसी में हाई बीपी शुरुआत में ज्यादा गंभीर नहीं लगता है. सिरदर्द, शरीर में सूजन, थकान, धुंधला दिखना या पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द जैसी दिक्कतों को लोग अक्सर प्रेगनेंसी की सामान्य परेशानी समझ लेते हैं.

एक्सपर्ट के मुताबिक, समय पर इलाज न मिलने पर प्री-एक्लम्पसिया शरीर के कई अहम अंगों जैसे किडनी, लिवर, दिमाग और ब्लड क्लॉटिंग सिस्टम को प्रभावित कर सकता है, इसका असर प्लेसेंटा पर भी पड़ सकता है और इस वजह से बच्चे में कम ग्रोथ, समय से पहले जन्म और कम वजन जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है.

पहले से तैयारी और बचाव पर भी जोर देना जरूरी

प्रेगनेंसी की देखभाल केवल समस्या होने के बाद इलाज तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि पहले से तैयारी और बचाव पर फोकस करना भी जरूरी है. इसके लिए नियमित चेकअप, ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग, बच्चे की ग्रोथ स्कैन और समय-समय पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है. यह मां और बच्चे की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी कदम हैं. एक्सपर्ट के मुताबिक, समय रहते जोखिम वाली स्थितियों की पहचान होने पर डॉक्टर प्रेगनेंसी की बेहतर निगरानी कर सकते हैं और जटिलताओं को समय पर संभाल सकते हैं. डिलीवरी की सही प्लानिंग करके मां और नवजात से जुड़े कई जोखिमों को कम किया जा सकता है. 

 बच्चे की भविष्य की स्वास्थ्य जरूरतों पर फोकस 

आज के समय में प्रेगनेंसी की तैयारी सिर्फ सुरक्षित डिलीवरी तक सीमित नहीं रह गई है, माता-पिता अब केवल मां और बच्चे की तुरंत सुरक्षा ही नहीं, बल्कि बच्चे की भविष्य की स्वास्थ्य जरूरतों को लेकर भी पहले से सोच रहे हैं. यही वजह है कि आज अम्बिलिकल कॉर्ड स्टेम सेल बैंकिंग जैसे फ्यूचर-रेडी विकल्पों को लेकर लोगों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है. आइए जानें इसके बारे में..

क्या होता है स्टेम सेल बैंकिंग?

एक्सपर्ट ने बताया कि कॉर्ड ब्लड में ब्लड बनाने वाली स्टेम सेल्स मौजूद होती हैं, जिनका इस्तेमाल आज कुछ ब्लड, इम्यून और मेटाबॉलिक बीमारियों के इलाज में स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के जरिए किया जा रहा है. उन्होंने यह स्पष्ट किया है कि स्टेम सेल बैंकिंग प्रीक्लेम्पसिया को न तो रोकती है और न ही उसका इलाज है. पर इस बात का संकेत जरूर है कि अब माता-पिता आखिरी समय में फैसले लेने के बजाय पहले से जानकारी लेकर वैज्ञानिक तरीके से भविष्य की तैयारी पर ध्यान दे रहे हैं. सुरक्षित प्रेगनेंसी के लिए जागरूकता, नियमित निगरानी और समय रहते सही तैयारी बेहद जरूरी है. 

प्रेगनेंसी में हाई बीपी को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और स्टेम सेल बैंकिंग जैसे भविष्य से जुड़े विकल्पों पर डॉक्टर की सलाह के साथ जिम्मेदारी के साथ विचार करना चाहिए. बता दें कि प्रेगनेंसी केवल बच्चे को जन्म देने तक सीमित नहीं है, यह मां की सेहत को सुरक्षित रखने और बच्चे के बेहतर भविष्य की तैयारी से भी जुड़ी है.

Article Source

https://www.dnaindia.com/hindi/health/report-what-is-stem-cell-banking-high-bp-in-pregnancy-preeclampsia-risk-symptoms-pregnancy-complications-future-health-planning-4239054